बोरिस
पास्तरनाक के साथ
वक़्त की
क़ैद में
लेखक
ओल्गा
इविन्स्काया
अनुवाद
आ. चारुमति रामदास
युग गुज़र जाएँगे, अनेक महान युग.
मैं तब नहीं रहूंगा. पिताओं और दादाओं का समय
लौट कर नहीं आएगा, जो कि ज़रूरी भी नहीं है, न ही वांछित है.
मगर एक न एक दिन वह सुंदर, महान, सृजनात्मक सत्य
अवश्य प्रकट होगा जिसे लम्बे समय तक छुपाकर रखा गया था.
वो होगा हिसाब चुकाने का समय. जीवन तुम्हारा होगा इतना समृद्ध
और सृजनशील जितना पहले कभी नहीं था.
तब मुझे याद करना.
बोरिस पास्तरनाक
लेखक की ओर से
शायद हर महान कवि ने अपने समय और उस अनंत के
बीच की दुर्भाग्यपूर्ण विसंगति को महसूस किया है, जिसकी रचना हर असली कलाकार करता
है. एक असामान्य प्रतिभा भी जीवन की ज्वलंत समस्याओं, मौकापरस्ती और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी,
साहित्यिक अवसरवादिता और आम लोगों की भीड़ की क़ैद में मुरझा जाएगी, दम तोड़ देगी. मगर
एक प्रतिभाशाली कलाकार की रचनाएँ अनंत को चीरती हुई भविष्य की ओर तीव्रता से बढ़ती
रहती हैं.
अपने समय और अनंत के मध्य की खाई को
जिन्होंने विशेष दुख से महसूस किया, उनमें से एक थे बोरिस पास्तरनाक:
तू – अनंत का बंधक
है वक़्त की कैद
में.
उन्हें मालूम था कि जब ये समय बीत जाएगा,
तब भी उनकी कविता रहेगी, और वक़्त की क़ैद से निकलकर भविष्य में गूँजेगी, जैसा हमारे
समय में गूँजता है पुश्किन का काव्य.
मगर फिर भी वह ये चाहते थे कि “वक़्त की
क़ैद” के उनके कुछ अंश इतिहास में सुरक्षित रहें. जीवन के अंतिम वर्षों में वे कई
बार मुझसे कहते थे:
“तुम्हें ज़िन्दा रहना होगा. तुम्हें उस
झूठ का पर्दाफ़ाश करना होगा जिसमें मुझे घेर दिया गया है...”
आह, वो ये न महसूस कर सके कि मेरी क़िस्मत
उनकी ख़्वाहिश को पूरा करने का काम कई सालों के लिए आगे धकेल देगी. गुज़र गए ये साल,
मगर उनकी ख़्वाहिश रह गई. इस बीच दिमाग़ से वो बातें भी गुम हो गईं, या भुला दी गईं
जिन्हें भूलना, शायद, नामुमकिन था.
इसलिए मैं कोई जीवन चरित्र या साहित्यिक
चित्र प्रस्तुत नहीं करूँगी. ये किताब कोई साहित्यिक-शोध नहीं है. मैं इसलिए लिख
रही हूँ ताकि कवि की याद को झूठी अटकलों से बचा सकूँ, अपने और उनके सम्मान तथा
गरिमा की रक्षा कर सकूँ. मुझे मालूम है कि किसी भी व्यक्ति के बारे में कोई राय
किसी हद तक गलत भी हो सकती और सही भी. ऐसे लोग भी हैं जो कवि को किसी और तरह से
जानते थे. अगर वे अपने संस्मरण लिखेंगे तो मैं दिलचस्पी से (और हो सकता है – ख़ुशी
से) उस पास्तरनाक का परिचय प्राप्त करूँगी, जिसे वे जानते थे.
मगर अभी, पास्तरनाक के साथ बिताए हुए चौदह
वर्षों को, मेरी दुखभरी ज़िन्दगी को याद करते हुए, मुझे बस एक ही बात का विश्वास है:
मैंने उस बोरिस पास्तरनाक के बारे में कहने का अधिकार प्राप्त किया है, जिसे मैं
जानती थी; सच कहने का अधिकार प्राप्त किया है, जैसा मैंने उस सच को देखा है.
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